shri antriksh parshvanath digambar Jain temple true facts and reality by ASI documents
श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ जी, शिरपुर
(वाशिम, जिला अकोला, महाराष्ट्र)
प्राचीन मंदिर व काले पाषाण से निर्मित भगवान पार्श्वनाथ जी की प्रतिमा जी के विषय में मंदिर जी में शिलालेख व जानकारी भारत सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा वर्ष 1902, 1907-8, 1910 व 1916 में अपने निम्न महत्वपूर्ण गजट व शिलालेख संग्रह आदि में सरकारी रूप से प्रकाशित की गयी है….....
1. वर्ष 1916 में पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित "इंस्क्रिप्शन्स इन सेंट्रल प्रोविन्सेस एंड बरार" के पेज न. 135 पर अकोला जिले के शिरपुर से प्राप्त शिलालेख के अनुसार
"अकोला से 37 मील दूर शिरपुर है! दिगम्बर जैन समाज से सम्बंधित अंतरिक्ष पार्श्वनाथ के मंदिर में संवत 1334 (1406 AD) का शिलालेख है! इस शिलालेख में अंतरिक्ष पार्श्वनाथ का नाम मंदिर के निर्माता जगसिंहा से सम्बंधित है!”
2. वर्ष 1910 में प्रकाशित “सेंट्रल प्रोविंसस एंड बरार जिला गज़ेटियर में अकोला जिला” गजट में सिरपुर के अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ के प्राचीन मंदिर के विषय में पेज न. 54 – 55 पर लिखा है कि
“दिगम्बर जैन समाज से सम्बंधित के प्राचीन मंदिर के पूर्वी दरवाजे पर संवत 1334 (1406 AD) के शिलालेख में अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ लिखा है! दरवाजे के दोनों तरफ और लिंटल पर नग्न जिन की प्रतिमा है!”
और पेज न. 391 पर लिखा है कि
“कहा जाता है कि लगभग 1500 वर्ष पूर्व विक्रम संवत 555 में बैशाख सुदी 3 को वर्तमान मंदिर में स्थापित की गयी थी”
3. वर्ष 1908 में भारत सरकार द्वारा प्रकाशित “इम्पीरियल गजट” के भाग XXIII के पेज न. 40 पर वर्णित है कि
"शिरपुर के दिगम्बर जैन समाज के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में 1406 AD का शिलालेख है! एलिचपुर के राजा एल्लुक को नदी किनारे प्रतिमा प्राप्त हुई! राजा द्वारा प्राथना करने पर उसे यह प्रतिमा उस स्थान से ले जाने की अनुमति मिली लेकिन पीछे मुडकर देखने हेतु मना किया गया लेकिन शिरपुर आकर उसने पीछे मुड़कर देखा जिस कारण प्रतिमा उसी स्थान पर हवा में बहुत से वर्षो रही!"
4. वर्ष 1907-8 में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा प्रकाशित "एपिग्राफिया इंडो - मोसलेमिका" के पेज न. 21 पर ..
“दिगम्बर जैन समाज से सम्बंधित मंदिर में संवत 1334 (1406 AD) में संस्कृत के शिलालेख में अन्तरिक्ष पार्श्वनाथ लिखा है!”
5. वर्ष 1902 में भारत सरकार के पुरातत्व विशेषज्ञ ‘कसन्स की रिपोर्ट’ के पेज न. 3 पर शिरपुर से प्राप्त शिलालेख में अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की जानकारी ऊपर क्रमांक 1 पर दी गयी जानकारी जैसी ही प्रकाशित की गयी है!
"पत्र टिके ना जहाँ अधर में गुणरत्नों का गिरिवर हो!
कितना विस्मय किसे नहीं हो, चलो देख लो शिरपुर को!
देवों के देव पार्श्व जिन अंतरिक्ष में शांत रहे।"
(शिलालेखों में प्रकाशित विवरण हेतु एल्बम देखे)
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Credit to विश्व जैन संगठन
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